हिमाचली खबर: Benefit of Applying Tilak: सनातन धर्म के विषय में जितना ज्यादा समझा या पढ़ा जाता है, वह उतना ही अधिक गूढ़ और नवीन जानकारी के साथ चकित करता है। सनातन में हर शुभ कार्य, पूजापाठ या रोजाना भी दोनों भौंहों के बीच तिलक लगाने की प्रथा है। लेकिन हर तिलक के पीछे एक विशेष कारण होता है। तिलक ललाट, ह्रदय, बाजू और गले पर लगाया जाता है, जिसके अलगअलग मायने है। इसके साथ ही लांल चंदन, पीला चंदन, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, केसर व भस्म के तिलक के भी अलगअलग मायने है।

क्या है ललाट पर तिलक के मायने
योग के अनुसार, हमारे शरीर में सात चक्र होते है, जिसे हम एनर्जी प्वाइंट कहते है। ये चक्र हमारी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा को कंट्रोल करती है। दोनों भौंहों के बीच के चक्र को अजना चक्र या थर्ड आई चक्र कहते है। अजना चक्र पर लगाए गए तिलक का संबंध हमारे आंतरिक ज्ञान, बुद्धि, सोच और अंतर्दृष्टि से होती है। यहां तिलक लगाने से हमारा चक्र एक्टिवेट होते है और हम अपने जीवन में ज्यादा फोकस हो पाते है।
तिलक बुरी एनर्जी से भी बचाता है। माथे पर तिलक एक प्रोटेक्शन शील्ड की तरह काम करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से माथे के बीचोंबीच लगा तिलक एकाग्रता, याददाश्त और फोकस को बढ़ाता है, क्यों कि यह हमारे ब्रेन का केंद्र बिंदु माना जाता है।
किससे करें तिलक, जिससे मिलेंगे अनेकों लाभ
कुमकुम से किए गए तिलक से शरीर में शुद्धता, उर्जा और अध्यात्म को बढ़ावा मिलता है। यह शक्ति का प्रतीक माना जाता है। वहीं हल्दी से किए गए तिलक का हिंदू धर्म में अलग महत्व है। पीला रंग वृहस्पति ग्रह का रंग माना जाता है। हल्दी में पाए जाने वाले एंटी बैक्टीरियल प्रॉपर्टी के कारण यह एक ओर जहां स्किन को क्लीन करता है, तो वहीं मन को भी शांत करता है। चंदन में शीतलता होती है, इससे किए गए तिलक से भी मन शांत होता है। यह हमारे आग्नेय चक्र को एक्टिवेट करता है, जिसका सीधा संबंध हमारे Pituitary gland से है।
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शिव के भक्त के लिए त्रिपुंद्रा तिलक
तिलक कई तरह से लगाए जाते है। शिव भक्त सदैव लगाते है, जिसमें ललाट पर विभूति या सफेद चंदन से तीन लाइनें बनाई जाती है और उसके बीच में गोल लाल कुमकुम लगाया जाता है।
उर्ध्व पुंद्रा तिलक
वैष्णव धर्म का अनुसरण करने वाले भक्त इस तिलक का अधिक उपयोग करते है। इसमें माथे पर चंदन से यू आकार बनाते है और बीच में लाल कुमकुम से लकीर। यह भगवान कृष्ण और प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति को दर्शाता है। यह प्रभु के प्रति भक्त के समर्पण को बताता है।
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