
Surat News: गुजरात के डायमंड सिटी सूरत से सूदखोरी के आतंक की एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है. यहां अडाजन पाटिया इलाके में रहने वाले एक कपड़ा व्यापारी ने ब्याजखोरों के अंतहीन जुल्म और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश की. 90 लाख रुपये के मूल कर्ज के बदले ढाई करोड़ रुपये चुकाने के बावजूद जब धमकियों का सिलसिला नहीं थमा, तो टूट चुके व्यापारी ने मौत को गले लगाने का प्रयास किया.
अडाजन पाटिया स्थित एटलस अपार्टमेंट के निवासी 48 वर्षीय अल्ताफ अशरफ ओरावाला लंबे समय से कपड़ा व्यवसाय से जुड़े हैं. जानकारी के मुताबिक, फरवरी 2025 में उन्होंने अपने भाई और उसके बिजनेस पार्टनर के कहने पर जुनैद युनुस ओरावाला नामक व्यक्ति से करीब 90 लाख रुपये ब्याज पर लिए थे.
परिजनों का आरोप है कि अल्ताफ भाई अब तक इस रकम के बदले लगभग 2.5 करोड़ रुपये ब्याज और अन्य शुल्कों के रूप में चुका चुके थे. यानी मूल राशि से करीब तीन गुना ज्यादा पैसा देने के बाद भी सूदखोर की भूख शांत नहीं हुई.
संपत्ति बिकी, फिर भी मिलीं गालियां और धमकियां
व्यापारी के बेटे ने बताया कि ब्याजखोरों का दबाव इतना बढ़ गया था कि परिवार को अपनी संपत्तियां तक बेचनी पड़ीं. सूदखोर सरेआम घर के बाहर आकर गाली-गलौज करते थे, रास्ते में रोककर मारपीट की धमकी देते थे और फोन पर लगातार मानसिक टॉर्चर किया जाता था. इसी प्रताड़ना से तंग आकर अल्ताफ भाई ने सलाबतपुरा दरगाह के पास फिनाइल पी लिया. गनीमत रही कि उनके दोस्तों ने उन्हें समय रहते देख लिया और अस्पताल पहुंचाया, जिससे उनकी जान बच गई.
‘भाई के कहने पर की बड़ी गलती’
अल्ताफ भाई ने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी व्यथा साझा की है. उन्होंने लिखा कि भाई और उसके पार्टनर के कहने पर इस लोन में शामिल होना उनके जीवन की सबसे बड़ी आर्थिक गलती थी. नोट के मुताबिक, सूदखोरों ने जबरन अधिक राशि की रसीदों पर हस्ताक्षर करवाए और मूल रकम से कहीं ज्यादा की वसूली की. उन्होंने इस पूरी स्थिति के लिए मुख्य रूप से जुनैद को जिम्मेदार ठहराया है.
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पुलिस की कार्रवाई और जांच
इस घटना ने सूरत में फल-फूल रहे अवैध ब्याजखोरी के काले कारोबार को एक बार फिर उजागर कर दिया है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट और परिजनों के बयानों के आधार पर दोषियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह मामला एक चेतावनी है कि कैसे ऊंचे ब्याज दर और अवैध वसूली का चक्र एक हंसते-खेलते परिवार को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर देता है.
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