गुरुवार को अनिल अग्रवाल की प्रमुख कंपनी Vedanta Limited के शेयर में करीब 65% की गिरावट देखकर निवेशकों में हड़कंप मच गया. पहली नजर में यह बड़ी गिरावट लगती है, लेकिन असल कहानी कुछ और है. कंपनी के डिमर्जर के कारण शेयर प्राइस एडजस्ट हुआ है, जिससे यह गिरावट दिख रही है. आइए समझते हैं कि आखिर इस गिरावट के पीछे की असली वजह क्या है और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है.

क्या सच में 65% गिरा है अनिल अग्रवाल की कंपनी का शेयर, ये है पूरा मामला?
क्या सच में 65% गिरा है अनिल अग्रवाल की कंपनी का शेयर, ये है पूरा मामला?

कंपनी का शेयर बुधवार को 773.60 रुपये पर बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार को यह 289.50 रुपये पर खुला और इंट्राडे में 271.5 रुपये तक पहुंच गया. हालांकि, यह गिरावट वास्तविक नुकसान नहीं है, बल्कि कंपनी के डिमर्जर के कारण हुआ प्राइस एडजस्टमेंट है. दरअसल, Anil Agarwal की अगुवाई वाली इस कंपनी ने अपने बिजनेस को अलगअलग हिस्सों में बांटने का फैसला किया है. अब Vedanta के शेयर से चार नई इकाइयों Vedanta Aluminium, Vedanta Power, Vedanta Oil & Gas और Vedanta Steel & Iron Ore की वैल्यू अलग हो चुकी है. यही कारण है कि शेयर की कीमत अचानक कम दिखाई दे रही है.

डिमर्जर से डाउन हुआ शेयर

इस प्रक्रिया के तहत कंपनी ने 1 मई को रिकॉर्ड डेट तय की थी, लेकिन महाराष्ट्र दिवस के कारण बाजार बंद रहने से 30 अप्रैल को ही प्रभावी रिकॉर्ड डेट माना गया. इसी दिन शेयर exdemerger ट्रेड हुआ, यानी इसमें नई कंपनियों की वैल्यू शामिल नहीं रही. डिमर्जर के बाद ये चारों बिजनेस अलगअलग कंपनियों के रूप में लिस्ट होंगे.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे निवेशकों को फायदा हो सकता है क्योंकि हर बिजनेस की वैल्यू अलगअलग तरीके से सामने आएगी. SAMCO Securities के एनालिस्ट के मुताबिक, जब एल्युमिनियम, ऑयल एंड गैस जैसे बिजनेस अलग लिस्ट होंगे, तो उनकी सही वैल्यू मार्केट में दिखेगी. डिमर्जर की यह प्रक्रिया 2023 में शुरू हुई थी, लेकिन कई वजहों से इसमें देरी हुई, जिसमें सरकारी आपत्तियां भी शामिल थीं.