भारत में लोक प्रशासन के डिजिटल सुधारों से सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों की उत्पादकता में सुधार हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के एक शोध पत्र में ये जानकारी दी गई है। शोध पत्र के अनुसार, जिन राज्यों ने इन बदलावों को तेजी से अपनाया, वहां के छोटे उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन राज्यों ने सरकारी प्रक्रियाओं को ज्यादा डिजिटल बनाया, वहां कंपनियों की उत्पादकता में तेज वृद्धि दर्ज की गई और अलगअलग कंपनियों के बीच उत्पादकता का अंतर भी कम हुआ है। 

डिजिटलीकरण सुधारों से बढ़ी MSME की उत्पादकता, IMF रिसर्च में सामने आईं अहम बातें
डिजिटलीकरण सुधारों से बढ़ी MSME की उत्पादकता, IMF रिसर्च में सामने आईं अहम बातें

देश में 11 करोड़ लोगों को रोजगार देता है MSME

देश में एमएसएमई क्षेत्र विनिर्माण उत्पादन का करीब 35 प्रतिशत योगदान देता है, लगभग 11 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है और कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। शोध में कहा गया कि देश में ज्यादातर छोटे उद्यम औपचारिक रूप से पंजीकृत नहीं हैं और इन पर कारोबारी सुधारों के प्रभाव को लेकर सीमित अध्ययन हुए हैं। आईएमएफ के अनुसार, वित्त वर्ष 201011 से 201415 के दौरान भारत में किए गए कारोबारी सुधार मुख्य रूप से सरकारी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर आधारित थे। इससे छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ, क्योंकि उनके लिए सरकारी प्रक्रियाओं से निपटने की लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है। 

डिजिटलीकरण से आसान होती हैं प्रशासनिक प्रक्रियाएं

हालांकि, अध्ययन में ये भी पाया गया कि छोटे उद्यम आमतौर पर उन राज्यों में स्थानांतरित नहीं होते जहां सुधार ज्यादा हुए हैं, यानी राज्यों के बीच इसका सीधा असर सीमित रहता है। रिपोर्ट के अनुसार, ये सुधार व्यापक स्तर पर कारोबारी माहौल बेहतर बनाने की पहल का हिस्सा थे। साल 2014 में राज्यों ने 98 बिंदुओं की कार्ययोजना पर सहमति जताई थी, जिसका उद्देश्य नियमों को आसान बनाना और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देना था। आईएमएफ ने कहा कि डिजिटलीकरण से प्रशासनिक प्रक्रियाएं आसान होती हैं, पारदर्शिता बढ़ती है और देरी कम होती है। इससे छोटे व्यवसायों का अनुपालन खर्च घटता है और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित होते हैं।