SIM Binding नियम की डेडलाइन बढ़ सकती है. कंपनियों ने तकनीकी समस्याओं के चलते समय मांगा था. सरकार ने पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए SIM Binding की आखिरी तारीख फरवरी 2026 तय की थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने की योजना है.

भारत सरकार मैसेजिंग ऐप्स के लिए सिम बाइंडिंग (SIM Binding) नियम को लागू करने की समयसीमा बढ़ाने की तैयारी में है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। दूरसंचार विभाग अब इस डेडलाइन को फरवरी 2026 से आगे बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर सकता है. टेक्निकल दिक्कतों के चलते कंपनियों ने सरकार से और समय मांगा था. इस फैसले से WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म को बड़ी राहत मिल सकती है.
क्यों बढ़ाई जा रही है डेडलाइन ?
सरकार ने पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए SIM Binding की आखिरी तारीख फरवरी 2026 तय की थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने की योजना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों को इस सिस्टम को लागू करने में कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसमें टेस्टिंग, सॉफ्टवेयर अपडेट और ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं. इसी वजह से दूरसंचार विभाग ने संकेत दिया है कि नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्लेटफॉर्म्स को पर्याप्त समय मिल सके.
SIM बाइंडिंग नियम क्या है और कैसे काम करेगा?
नए नियम के तहत व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य ऐप्स को यूजर्स की पहचान उनके मोबाइल नंबर से जोड़नी होगी. इसका मतलब है कि यूजर केवल उसी डिवाइस पर अकाउंट एक्सेस कर पाएगा, जिसमें रजिस्टर्ड SIM मौजूद होगी. अगर SIM नहीं होगा तो लॉगिन संभव नहीं होगा. इसके अलावा वेब या लिंक्ड डिवाइस पर यूजर्स को हर 6 घंटे में दोबारा लॉगिन करना पड़ सकता है, जिससे सुरक्षा और मजबूत होगी.
यूजर्स पर क्या होगा असर?
सरकार का मुख्य उद्देश्य टेलीकॉम पहचान के गलत इस्तेमाल को रोकना है, खासकर विदेश से होने वाले साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाना. पहले से ही बैंकिंग और पेमेंट ऐप्स में इस तरह के नियम लागू हैं, जिससे सुरक्षा बढ़ी है. अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी यही सिस्टम लागू किया जाएगा. हालांकि, इससे यूजर्स को थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह उनकी डिजिटल सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद करेगा.
💬 Comments (0)
Leave a Comment