अगर मैं उस रात मनीष भाई का हाथ पकड़कर खींच लाता, तो आज हमारे घर के आंगन में चीखें नहीं, बल्कि भाइयों की हंसी गूंज रही होती। मेरी एक चूक ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं।