सरकार ने IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को लेकर अपनी विनिवेश योजना की फिर से समीक्षा शुरू कर दी है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में हलचल तेज हो गई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बाजार की अनिश्चितता के चलते इस डील में देरी की आशंका जताई जा रही है. हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि IDBI बैंक की बिक्री तय है और इसे जल्द ही पूरा करने की दिशा में सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है.

IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपनी विनिवेश रणनीति की समीक्षा की है. ईटी की रिपोर्ट के मुताबित, सोमवार को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में सचिवों के एक प्रमुख समूह ने इस अहम मुद्दे पर चर्चा की. बैठक में निवेशकों की घटती दिलचस्पी और वैश्विक परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के असर का गहन विश्लेषण किया गया.
IDBI बैंक
दरअसल, फरवरी में IDBI बैंक की बिक्री प्रक्रिया को झटका लगा था, जब प्राप्त वित्तीय बोलियां सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम मूल्य से कम रहीं. इसके बाद से सरकार इस सौदे को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाए हुए है. अब अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि निवेशकों की पेशकश और सरकार के मूल्यांकन के बीच संतुलन बना रहे, ताकि भविष्य में किसी तरह का बेमेल न हो. सरकार इस सौदे के लिए संशोधित मूल्यांकन और नई समयसीमा तय करने पर विचार कर रही है. माना जा रहा है कि बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस बार अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा. इससे संभावित निवेशकों को भी स्पष्ट संकेत मिलेगा और डील को आगे बढ़ाने में आसानी होगी.
इस बीच, एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कहा कि IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री होकर ही रहेगी. उन्होंने भरोसा जताया कि इस प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी और सरकार इसे तय समय के भीतर पूरा करेगी. सरकार ने वित्त वर्ष 202627 के लिए विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के 45,306 करोड़ रुपये से काफी अधिक है. ऐसे में IDBI बैंक की बिक्री इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
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