लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक, 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ता है। रिकॉर्ड 3.5 साल से भी कम समय में तैयार यह कॉरिडोर न केवल यूपी की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि भारत के लॉजिस्टिक्स बैकबोन को भी मजबूत करेगा।

प्रमुख विशेषताएं और विकासकर्ता
गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण सार्वजनिकनिजी भागीदारी मॉडल के तहत उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है।
- कुल लंबाई: 594 किमी ।
- अदाणी समूह की भूमिका: अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड ने इस एक्सप्रेसवे के लगभग 80% हिस्से का निर्माण किया है।
- IRB इंफ्रास्ट्रक्चर: शेष 130 किमी का विकास IRB इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा किया गया है।
आर्थिक और लॉजिस्टिक्स क्रांति
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुमानों के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे सालाना ₹25,00030,000 करोड़ की लॉजिस्टिक्स बचत करेगा।
- समय की बचत: प्रयागराज से मेरठ की यात्रा का समय 11 घंटे से घटकर मात्र 6 घंटे रह जाएगा।
- ईंधन की बचत: लगभग 30% ईंधन की बचत होने का अनुमान है।
- जीडीपी में योगदान: यह राज्य की जीडीपी में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का योगदान देगा।
- रोजगार: अगले एक दशक में लगभग 3 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
सुरक्षा और सामरिक महत्व
- AI तकनीक: एक्सप्रेसवे पर उन्नत अलर्ट और सड़क सुरक्षा के लिए AIसक्षम कैमरा सिस्टम तैनात किए गए हैं।
- आपातकालीन लैंडिंग: शाहजहांपुर जिले में 3.5 किलोमीटर का स्ट्रेच भारतीय वायु सेना के लिए आपातकालीन लैंडिंग सुविधा के रूप में विकसित किया गया है।
- कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर औद्योगिक क्लस्टरों, रक्षा विनिर्माण क्षेत्रों और कृषि बेल्टों को जोड़ता है।
पर्यटन और औद्योगिक गलियारे
यूपी सरकार इस एक्सप्रेसवे के किनारे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित सभी 12 जिलों में 11 औद्योगिक गलियारे स्थापित कर रही है। इसके अलावा, यह गढ़मुक्तेश्वर, कल्किधाम और त्रिवेणी संगम जैसे प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों को जोड़कर धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
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