हिमाचली खबर: सपेरे की बीन देखते ही सांप अलर्ट हो जाता है. सपेरे और बीन दोनों को घूरते हुए फन फैलाता है, लेकिन सवाल है कि सांप सपेरे को अपने लिए खतरा मानता है या फिर बीन की आवाज सुनकर मदहोश होने लगता है. लोगों में आम धारणा है कि सांप बीन की आवाज सुनकर मदहोश होने लगता है. इसके पीछे का विज्ञान समझेंगे तो कई चौंकाने वाली बातें पता चलती हैं.

विज्ञान कहता है कि सांप में इंसानों की तरह सुनने की क्षमता नहीं होती. न ही इंसानों की तरह बाहरी कान होते हैं जो तुरंत किसी आवाज पर हरकत कर सकें. फिर सवाल है कि जब सांप सुन ही नहीं सकते तो फिर बीन बजते ही अलर्ट क्यों हो जाते हैं? फन को फैलाने लगते हैं. फुंफकारने क्यों लगते हैं? जानिए इन सवालों के जवाब.
सुन नहीं सकते तो बीन के सामने क्यों फन फैलाते हैं?
ज्यादातर लोग मानते हैं कि बीन की आवाज सुनकर सांप मदहोश होने लगता है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं, सांप बीन की आवाज सुनकर न तो नाचता है और न ही मदहोश होता है. Smithsonian National Zoo का दावा है कि सांप के बाहरी कान नहीं होते. यह संगीत को इंसानों की तरह नहीं सुन पाता, लेकिन इसके अंदरूनी कान वाइब्रेशन को डिटेक्ट कर लेते हैं. जमीन से मिलने वाली तरंगें वो समझ पाता है. इन्हीं तरंगों की मदद से वो अपने शिकार और दुश्मन का पता लगाता है.
सांप की नजर बीन पर बनी रहती है और वो अलर्ट मोड में आ जाता है. AI Generated
अब सवाल उठता है कि जब सुन ही नहीं सकते तो बीन के सामने मदहोश कैसे होने लगते हैं. दरअसल, संगीत नहीं, सांप की नजर बीन पर होती है. बीन लगातार हिलती रहती है और सांप की नजर बीन पर बनी रहती है. बीन के मूवमेंट के साथ सांप हिलता है. सांप को बीन एक खतरे की तरह लगती है और वो अलर्ट मोड में आ जाता है.
सांप के पास इंसानों की तरह संगीत सुनने वाले कान नहीं होते.
इस तरह लोगों को लगता है सांप मदहोश हो रहा है, लेकिन सांप सपेरे और बीन दोनों को खतरा मानता है. इसलिए फुंफकारता है और फन फैलाता है.
जबड़े की हड्डियां करती हैं असली काम
विशेषज्ञ कहते हैं कि सांप खतरे को भांपने के लिए जमीन से मिलने वाली तरंगों का इस्तेमाल करता है. जब सांप आराम करता है तो यह अपना सिर जमीन पर रखता है. इसकी जबड़े की हड्डियां सेंसर की तरह होती हैं. यह जमीन से मिलने वाले वाइब्रेशन को डिकोड करती है. यह कम फ्रीक्वेंसी वाली तरंगों को भी हवा के जरिए महसूस कर लेता है जो आमतौर पर बहुत कम जीवों के कानों तक पहुंच पाती है. इसलिए यह कहना गलत है कि सांप के कान नहीं होते और वो पूरी तरह से नहीं सुन पाता.
सांप तरंगों के जरिए सुनने का काम करता है.
इसको लेकर बकायदा रिसर्च भी की गई है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन जर्नल में पब्लिश रिसर्च कहती है कि सांप तरंगों के जरिए सुनने का काम करता है. जमीन की सतह से मिलने वाली तरंगें उस समय सबसे ज्यादा काम की साबित होती हैं जब आसपास कोई खतरा होता है.
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