देश की दिग्गज आईटी कंपनी Infosys हाल के महीनों में निवेशकों के भरोसे की कड़ी परीक्षा से गुजर रही है. कभी शेयर बाजार की ब्लूचिप पहचान रखने वाली यह कंपनी अब भारत की टॉप 10 वैल्यूएबल कंपनियों की सूची से बाहर हो गई है. मार्केट कैप में तेज गिरावट, कमजोर ग्रोथ गाइडेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने निवेशकों की चिंताओं को और गहरा कर दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या यह गिरावट सिर्फ अस्थायी है या आईटी सेक्टर में कोई बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव शुरू हो चुका है. कंपनी को अभी कुछ ही दिनों में दोहरा झटका लग गया. पहला तो कंपनी को करीब 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और दूसरा वह टॉप 10 की लिस्ट से बाहर हो गई.

इंफोसिस को लगा डबल झटका, 2 लाख करोड़ हुआ साफ; टॉप 10 लिस्ट से भी हुई बाहर
इंफोसिस को लगा डबल झटका, 2 लाख करोड़ हुआ साफ; टॉप 10 लिस्ट से भी हुई बाहर

भारतीय आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Infosys इस साल शेयर बाजार में भारी दबाव का सामना कर रही है. कंपनी का मार्केट कैप करीब 2 लाख करोड़ रुपये घट चुका है, जिसके चलते यह देश की टॉप 10 वैल्यूएबल कंपनियों की सूची से बाहर हो गई है. मौजूदा समय में कंपनी का मार्केट कैप लगभग 4.9 लाख करोड़ रुपये रह गया है. ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह कंपनी का कमजोर आउटलुक रहा. मार्च तिमाही में कंपनी ने 46,402 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 8,501 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो अनुमान से बेहतर था. इसके बावजूद निवेशकों को झटका तब लगा जब कंपनी ने FY27 के लिए सिर्फ 1.5% से 3.5% ग्रोथ का गाइडेंस दिया.

कंपनी के शेयरों में गिरावट

रिजल्ट का असर शेयर पर साफ दिखा, जहां एक ही दिन में करीब 7% की गिरावट आई और सालभर में यह गिरावट 30% तक पहुंच गई. इस बीच Life Insurance Corporation of India ने टॉप 10 में जगह बना ली, जबकि Tata Consultancy Services भी रैंकिंग में पीछे खिसक गई, जो पूरे आईटी सेक्टर में कमजोरी का संकेत है. एक्सपर्ट का मानना है कि समस्या सिर्फ साइक्लिकल नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल है. कंपनियां अब खर्च कम करने, लागत घटाने और वेंडर कंसोलिडेशन पर फोकस कर रही हैं. ऐसे में आईटी कंपनियों के लिए पारंपरिक बड़े डील्स से कमाई का रास्ता धीमा पड़ रहा है. हालांकि, Infosys AI और ऑटोमेशन में निवेश कर रही है. कंपनी ने Topaz जैसे प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं और हजारों डेवलपर्स AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे डेटा, क्लाउड और ऑटोमेशन में नए अवसर जरूर बन रहे हैं, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है.

AI के चलते प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, जिसका फायदा क्लाइंट्स को कम कीमत के रूप में मिल रहा है. इससे कंपनी के पारंपरिक बिजनेस में प्राइस प्रेशर बढ़ रहा है और रेवेन्यू ग्रोथ सीमित हो रही है. डिमांड की स्थिति भी असमान बनी हुई है. जहां फाइनेंशियल सर्विसेज और एनर्जी सेक्टर में स्थिरता दिख रही है, वहीं मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और टेलीकॉम सेक्टर अभी भी दबाव में हैं.