हिमाचली खबर: भारतीय डोसे ने खानपान की ग्लोबल रैंकिंग में तगड़ी छलांग लगाई है. दुनिया भर की लोकप्रिय फूड गाइड TasteAtlas की हालिया रैंकिंग में मसाला डोसा छठे पायदान पर पहुंच गया है. इसे 4.3 स्टार रेटिंग मिली है. यह रैंकिंग बताती है कि किस कदर दुनियाभर में डोसे को लेकर दीवानगी बढ़ी है. भारतीय फूड का स्वाद खानपीने के शौकीनों का आकर्षित कर रहा है. डोसे का नाम सुनकर ज्यादातर लोगों के जेहन में चेन्नई समेत दक्षिण भारतीय राज्यों के शहरों के नाम उभरते हैं, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि भारत में डोसा की कैपिटल किस शहर को कहते हैं.

न चेन्नई, न मैसूर, भारत का कौन सा शहर है डोसा की राजधानी? जिसने ग्लोबल फूड रैंकिंग में लगाई छलांग​
न चेन्नई, न मैसूर, भारत का कौन सा शहर है डोसा की राजधानी? जिसने ग्लोबल फूड रैंकिंग में लगाई छलांग​

यूं तो डोसा की वैरायटी के लिए दक्षिण के चेन्नई से लेकर हैदराबाद तक कई शहर जाने जाते हैं, लेकिन सही मायने में कर्नाटक का बेंगलुरू ही दुनिया की डोसा कैपिटल कहलाता है. यहां टेस्ट की ऐसे वैरायटी मिलती है जो दक्षिण के दूसरे शहरों में कम मिलती है.

बेंगलुरू क्यों कहलाता है डोसा कैपिटल?

बेंगलुरू को दुनिया की डोसा कैपिटल कहने के पीछे भी कई कारण हैं. यूं तो बेंगलुरू को हमेशा से ही डोसा की वैरायटी और टेस्ट के लिए जाना गया है, लेकिन डोसा को लेकर यहां सबसे ज्यादा प्रयोग हुए हैं. डोसे का मॉडर्न फ्यूजन देखना है तो बेंगलुरू का रुख करना पड़ेगा. यहां के कई रेस्तरां डोसा को अलगअलग तरह से बनाते हैं. इसके लिए रिफाइंड टेक्नीक का इस्तेमाल करते हैं.

12वीं शताब्दी के संस्कृत साहित्यिक ग्रंथ “मनसोलसा” में डोसा का उल्लेख “दोसाका” के रूप में किया है.

खासतौर पर बसवनगुडी और जयनगर को डोसे के स्पेशल आउटलेट के लिए जाना जाता है. शहर की खानपान की संस्कृति ने डोसे को स्थानीय लोगों और पर्यटकों का मुख्य व्यंजन बना दिया है. यही वजह है कि इसे दुनिया की डोसा कैपिटल कहते हैं.

भारत में कई सामग्रियों और कई तरीकों से अलगअलग प्रकार के डोसे बनाए जाते हैं. सबसे ज्यादा पॉपुलर वैरायटी में मसाला डोसा, प्लेन डोसा, रवा डोसा, सेट डोसा, पेपर डोसा और प्याज डोसा शामिल हैं. हर डोसे की बनावट, मोटाई और भराई अलगअलग होती है. कुछ डोसे कुरकुरे होते हैं, जबकि कुछ नरम और स्पंजी होते हैं. अलगअलग हिस्सों के प्रभावों के कारण पूरे देश में डोसा बनाने के तरीके और स्वाद में भी वैरायटी दिखती है.

दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों ही इसे अपना फूड मानते हैं.

तमिलनाडु या कर्नाटक, डोसा किसका फूड?

डोसा की उत्पत्ति 2 हजार साल पुरानी मानी जाती है. ऐतिहासिक प्रमाणों से पता चलता है कि यह प्राचीन पाक परंपराओं में भी मौजूद था. दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों ही इसे अपना फूड मानते हैं. फूड हिस्टोरियन के.टी. अचैया ने अपनी पुस्तक “द स्टोरी ऑफ आवर फूड” में लिखा है कि राजा सोमेश्वर तृतीय, जिन्होंने वर्तमान कर्नाटक राज्य के कुछ हिस्सों पर शासन किया, उन्होंने 12वीं शताब्दी के संस्कृत साहित्यिक ग्रंथ “मनसोलसा” में डोसा का उल्लेख “दोसाका” के रूप में किया है. हालांकि, मेल अड़ाई और अप्पम तमिलनाडु में बहुत पहले से खाए जाते थे.

डोसा का इतिहास 2 हजार साल पुराना है.

बीबीसी की रिपोर्ट में दक्षिण भारतीय इतिहास के शोधकर्ता और कोर्टयार्ड टूर्स के संस्थापक जयकुमार एस का कहना है, अप्पम और मेल अड़ाई का उल्लेख संगम युग की तीसरी या चौथी शताब्दी की साहित्यिक रचना मधुरैकंची में मिलता है. लेकिन, दोसाई शब्द का प्रयोग बहुत बाद में हुआ.

जयकुमार एस के मुताबिक, प्राचीन तमिल शब्दकोश सेंथन दिवाकरम में दोसाई का जिक्र अप्पम की एक किस्म के रूप में किया गया है, जिसे अक्सर नारियल के दूध के साथ खाया जाता है.