किंग चार्ल्स का अमेरिका दौरा इस वक्त खूब चर्चा में है। कभी अपने बयानों की वजह से तो कभी उन पर होने वाले तंज की वजह से। पहले किंग चार्ल्स का वो बयान जहां उन्होंने अमेरिकनंस को फ्रेंच बोलने की याद दिलाई थी। अब न्यूयॉर्क के मेयर ने कोहिनूर हीरा वापस मांगकर उनके इस अमेरिका दौरे को और दिलचस्प बना दिया। दरअसल न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने किंग चार्ल्स से मुलाकात की लेकिन इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले ममदानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में धमाका कर दिया था। दरअसल जब उनसे पूछा गया कि वह किंग चार्ल्स से मिलेंगे तो क्या कहेंगे? तो मेयर साहब ने मजाकिया और बेबाक अंदाज में कहा अगर मुझे किंग से अकेले में बात करने का मौका मिला तो मैं उन्हें कोहिनूर वापस लौटाने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। अबाउट एनीथिंग सेफ आई वाली टू रिटर्न द कोहिनूर डायमंड। यानी कोहिनूर की गूंज अब लंदन से निकलकर न्यूयॉर्क की गलियों तक पहुंच गई।

भारत को वापस करो...किंग चार्ल्स से कोहिनूर वापस मांगने लगे अमेरिका के मेयर ममदानी
भारत को वापस करो…किंग चार्ल्स से कोहिनूर वापस मांगने लगे अमेरिका के मेयर ममदानी
हालांकि इस बयान के बाद 91 मेमोरियल पर किंग चार्ल्स और मेयर ममदानी की मुलाकात भी हुई। इस मुलाकात में दोनों मुस्कुराते हुए हाथ मिलाते दिखे। अब एक सवाल यह है कि क्या मेयर साहब ने हीरे की बात दबी जुबान में कही या नहीं कही। खैर, यह तो राज है, लेकिन चर्चा पूरे न्यूयॉर्क में हो रही थी। अच्छा यहां भारत का भी एक एंगल है। आपको बता दें कि यह कोहिनूर हीरा भारत के गौरव से जुड़ा है। 1849 में महाराजा दिलीप सिंह ने इसे महारानी विक्टोरिया को सौंपा था। जिसके बाद यह ब्रिटिश मुकुट से जुड़ गया। हालांकि भारत में इसे बारबार वापस लाने की मांग उठती रही और अब न्यूयॉर्क के मेयर ने भी इस मांग को हवा दे दी। 

कहानी सिर्फ कोहिनूर पर खत्म नहीं होती। इस दौरे पर कोहिनूर वाक्य से पहले किंग शाल ने भी राष्ट्रपति ट्रंप को उन्हीं के अंदाज में ऐसा रोस्ट किया था कि ट्रंप का चेहरा भी देखने लायक था। हुआ यह था कि कुछ समय पहले ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर तंज कसा था कि अगर अमेरिका ने वर्ल्ड वॉर में मदद ना की होती तो आज आधा यूरोप जर्मन बोल रहा होता। हालांकि वाइट हाउस के स्टेट डिनर में किंग चार्ल्स ने सही मौका देखा और मुस्कुराते हुए बड़े शांत लहजे में कहा मिस्टर प्रेसिडेंट आपने कहा था कि अमेरिका ना होता तो यूरोप जर्मन बोल रहा होता। तो क्या मैं यह कहने की हिम्मत कर सकता हूं कि अगर हम ब्रिटिश ना होते तो आज आप लोग फ्रेंच बोल रहे होते।