नोएडा में हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें सोशल मीडिया और बाहरी तत्वों की भूमिका सामने आई है. जांच में पाकिस्तान से ऑपरेट X अकाउंट, QR कोड के जरिए बने व्हाट्सएप ग्रुप और 62 गिरफ्तारियों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है.

नोएडा में हाल ही में हुई मजदूर हिंसा को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. पुलिस कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) में सामने आया कि यह घटना अचानक भड़की भीड़ का नतीजा नहीं, बल्कि एक ‘मेलाफाइड इंटेंशनली ऑर्गेनाइज्ड एक्टिविटी’ थी यानी हिंसा को पहले से प्लान कर अंजाम दिया गया. जांच में कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन पर मजदूरों को भड़काने और माहौल खराब करने का आरोप है.
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और बाहरी तत्वों की अहम भूमिका रही. इतना ही नहीं, जांच के दौरान कुछ X (ट्विटर) अकाउंट्स के पाकिस्तान से संचालित होने की बात भी सामने आई है, जिससे मामले ने राष्ट्रीय सुरक्षा का रूप ले लिया है.
क्या नोएडा हिंसा पहले से प्लान की गई थी?
पुलिस कमिश्नर ने साफ तौर पर कहा कि नोएडा में हुई हिंसा “मेलाफाइड इंटेंशेलनी ऑर्गेनाइज एक्टीविटी” थी. इसका मतलब यह है कि हिंसा को स्वतःस्फूर्त नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया. पुलिस का मानना है कि कुछ लोग औद्योगिक क्षेत्रों को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे थे.

किन लोगों पर मजदूरों को भड़काने का आरोप लगा?
जांच में मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद के नाम सामने आए हैं. पुलिस के अनुसार रूपेश राय खुद को ऑटो चालक बताता है. आदित्य आनंद बेरोजगार है. ये लोग लंबे समय से देशभर में विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं. रूपेश 2018 से और आदित्य 2020 से लगातार अलग-अलग जगहों पर हो रहे आंदोलनों में मौजूद रहे हैं, जिससे इनके एक्टिव नेटवर्क पर भी सवाल उठ रहे हैं.
व्हाट्सएप और QR कोड से कैसे फैला आंदोलन?
पुलिस जांच में सामने आया कि 31 मार्च और 1 अप्रैल को नोएडा में मूवमेंट की शुरुआत हुई. 9 और 10 अप्रैल को QR कोड के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए. इन ग्रुप्स के माध्यम से मजदूरों को एकजुट किया गया यानी डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर भीड़ जुटाने की रणनीति अपनाई गई.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन कैसे हिंसक हुआ?
पुलिस के अनुसार 10 अप्रैल को श्रमिक आंदोलन शुरू हुआ.11 अप्रैल को रोड जाम के लिए उकसाया गया. उसी दिन शांतिपूर्ण समझौता भी हुआ. लेकिन इसके बावजूद, कुछ लोगों ने उत्तेजक भाषण देकर माहौल को फिर से भड़काया और मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाया.
13 अप्रैल को क्या हुआ, जिसने हालात बिगाड़ दिए?
पुलिस ने बताया कि 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के सामने जुटने के लिए लोगों को भड़काया गया. इस दौरान भीड़ को उकसाने में वही लोग सक्रिय थे. हालात तब और बिगड़ गए जब प्रदर्शन को शांत कराने के प्रयास के बीच अफवाहों का दौर शुरू हो गया.
सोशल मीडिया और पाकिस्तान कनेक्शन क्या है?
यह इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू है. पुलिस के मुताबिक 13 अप्रैल को दो X (ट्विटर) अकाउंट्स से गलत सूचना फैलाई गई. प्रदर्शन के दौरान मजदूरों को इन पोस्ट्स को देखते हुए पाया गया. जांच में सामने आया कि ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे. पिछले तीन महीनों से VPN के जरिए ऑपरेट किए जा रहे थे. यह संकेत देता है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सुनियोजित तरीके से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई.
अब तक पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
नोएडा पुलिस ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की है सेक्टर-20 के थाने में FIR दर्ज की गई. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। अब तक 13 मुकदमे दर्ज किए गए हैं जिसमें कुल 62 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इनमें से 9 लोग आगजनी में शामिल थे. कई आरोपी पुलिस पर हमला करने वाली भीड़ का हिस्सा थे. गिरफ्तार लोगों में ज्यादातर नॉन-लेबर हैं. कुछ लोग बाहर से आकर हिंसा में शामिल हुए थे.
नोएडा हिंसक प्रदर्शन के बाद लगभग 700 लोगो को पुलिस जे पकड़ा है, जिसमे गिरफ्तार 62 ऐसे है जो हिनियस क्राइम से जुड़े हुए जिसमे साजिशकर्ता, आगजनी करने वाले पुलिस पर हमला करने वाले, तोड़फोड़ करने वाले है, इन 62 मे से अधिकतर नॉन लेबर है
💬 Comments (0)
Leave a Comment