हिमाचली खबर: इजराइल 78 बरस का हो गया. स्वतंत्र देश घोषित होने के बाद से यह देश लगातार संघर्ष कर रहा है. अरब देशों से युद्ध लड़ रहा है. बावजूद इसके इस यहूदी देश की विकास यात्रा रोचक है. प्रेरक है. अपने शोध के बूते इजराइल ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है. कई बड़े देश उसकी ओर आस भरी नजरों से देख रहे हैं. इजराइल दुनिया के नक्शे पर 14 मई 1948 को आया था. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि जिस जमीन पर यह देश आबाद है, वहां किसकिस का कब्जा था? रोमन, ऑटोमन और ब्रिटिश, कब किसने यहां राज किया?

इजराइल, फिलिस्तीन, वेस्ट बैंक और गाजा वाला इलाका दुनिया के सबसे पुराने और सबसे विवादित क्षेत्रों में गिना जाता है. इस भूमि को इतिहास में अलगअलग नामों से जाना गया. जैसे कनान, यहूदिया, सामरिया, सीरियापलेस्टाइना, दक्षिणी लेवांत और फिलिस्तीन. इस जमीन पर एक ही शक्ति का लगातार शासन नहीं रहा. हजारों साल में यहां कई राजवंश, साम्राज्य और बाहरी ताकतें आईं. इसलिए यह कहना सही होगा कि इस क्षेत्र पर बहुत बार कब्जा और शासन बदलता रहा.
1 सबसे पहले किसका राज था?
सबसे पुराने लिखित और पुरातात्विक प्रमाण बताते हैं कि इस क्षेत्र में प्राचीन कनानी नगरराज्य थे. यह कांस्य युग की बात है. उस समय यहां छोटेछोटे नगर थे. वे मिस्र जैसी बड़ी शक्तियों के प्रभाव में भी आते थे. इस दौर का एक अहम स्रोत है अमरना पत्र. यह मिस्र और कनानी शासकों के बीच के राजनयिक पत्र हैं. इनसे पता चलता है कि यह इलाका कई स्थानीय शासकों में बंटा था और मिस्र का प्रभाव भी इस पर था.
यरूशलेम के पुराने शहर में बना डोम ऑफ द रॉक, यह पवित्र इस्लामिक तीर्थस्थल है.
2 प्राचीन इजराइली और यहूदा के राज्य
लगभग पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व में यहां इजराइल और यहूदा नाम के राज्य उभरे. यहूदी परंपरा में यह भूमि धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस काल का उल्लेख हिब्रू बाइबिल में मिलता है. लेकिन इतिहासकार केवल धार्मिक ग्रंथों पर निर्भर नहीं रहते. वे शिलालेखों और पुरातत्व को भी देखते हैं. एक अहम प्रमाण है मेर्नेप्ता स्तंभ. यह मिस्र का शिलालेख है. इसमें इजराइल नाम का उल्लेख मिलता है.
3 अश्शूर और बाबुल का कब्जा
इसके बाद इस क्षेत्र पर बड़ी साम्राज्यवादी ताकतों की नजर पड़ी. पहले अश्शूर साम्राज्य ने उत्तरी राज्य इजराइल पर कब्जा किया. फिर बाबुल साम्राज्य ने यहूदा पर अधिकार किया. 586 ईसा पूर्व के आसपास बाबुल ने यरूशलेम पर हमला किया. पहला मंदिर नष्ट हुआ. कई लोगों को निर्वासन में ले जाया गया. यह घटना यहूदी इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है.
इजराइल की वाइट सिटी कहलाने वाला तेलअवीव.
4 बाबुल के बाद शुरू हुआ फारसी शासन
बाबुल के बाद आकेमेनिड फारसी साम्राज्य आया. फारस के राजा साइरस ने बाबुल को जीता. इसके बाद कुछ यहूदियों को लौटने और मंदिर पुनर्निर्माण की अनुमति मिली. इस काल में स्थानीय धार्मिक जीवन फिर से संगठित हुआ. इसका उल्लेख फारसी प्रशासनिक अभिलेखों में भी मिलता है और एज्रा और नहेमायाह जैसे ग्रंथों में भी.
5 यूनानी और हेलेनिस्टिक शासन
चौथी सदी ईसा पूर्व में सिकंदर महान ने इस क्षेत्र को जीता. उसके बाद यह जमीन उसके उत्तराधिकारी राजवंशों में बंटी. पहले टॉलेमी और फिर सेल्यूसिड शासकों का प्रभाव रहा. यहीं से यूनानी संस्कृति का असर बढ़ा. बाद में सेल्यूसिड शासन के खिलाफ यहूदी विद्रोह हुआ. इससे हस्मोनी राज्य उभरा. यह एक स्थानीय यहूदी राजसत्ता थी.
यहूदियों ने आजादी के लिए लम्बा संघर्ष किया है.
6 फिर शुरू हुआ रोमन साम्राज्य
63 ईसा पूर्व में रोमन सेनापति पोम्पेई ने यरूशलेम पर कब्जा किया. इसके बाद यह क्षेत्र रोमन प्रभाव में आ गया. रोमन काल में हेरोद जैसे शासक हुए. वे स्थानीय राजा थे, पर रोमन समर्थन से शासन करते थे. बाद में यहूदियों और रोम के बीच बड़े विद्रोह हुए. 70 ईस्वी में रोमन सेना ने दूसरा मंदिर नष्ट किया. 132135 ईस्वी के बार कोखबा विद्रोह के बाद रोमन सत्ता ने कठोर दमन किया. कई इतिहासकार मानते हैं कि इसी दौर में रोमन प्रशासन ने जुडेआ के बजाय सीरिया पलेस्टाइना नाम को बढ़ावा दिया.
7 फिर शुरू हुआ पूर्वी रोमन साम्राज्य शासन
रोमन साम्राज्य के विभाजन के बाद यह क्षेत्र बीजान्टिन यानी पूर्वी रोमन साम्राज्य के अधीन रहा. यह लगभग चौथी से सातवीं सदी तक चला. इस समय ईसाई धार्मिक स्थलों का महत्व बहुत बढ़ा. यरूशलेम ईसाई जगत का प्रमुख केंद्र बन गया.
8 अरबइस्लामी शासन भी चला
सातवीं सदी में राशिदुन खिलाफत की सेनाओं ने इस क्षेत्र पर कब्जा किया. इसके बाद उमय्यद, अब्बासी, और बाद में फातिमी शासन आए. इस दौर में अरबी भाषा और इस्लामी प्रशासनिक ढांचा मजबूत हुआ. यरूशलेम में डोम ऑफ द रॉक और अलअक्सा जैसे महत्वपूर्ण इस्लामी स्मारक बने. यही कारण है कि यह भूमि मुसलमानों के लिए भी बहुत पवित्र है.
इजराइल के झंडे पर बना छह कोनों वाला सितारा यहूदी धर्म का प्रमुख प्रतीक है.
9 क्रूसेडर और फिर मुस्लिम सल्तनतें
1099 ईस्वी में क्रूसेडर सेनाओं ने यरूशलेम पर कब्जा किया और लैटिन ईसाई राज्य स्थापित किया. लेकिन यह शासन स्थायी नहीं रहा. 1187 में सलाउद्दीन अय्यूबी ने यरूशलेम फिर से जीत लिया. इसके बाद अय्यूबी और फिर ममलूक शासन रहा.
10 चार सौ साल तक चला ऑटोमन शासन
साल 1517 में ऑटोमन तुर्क साम्राज्य ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया. उनका शासन लगभग 400 साल चला. यह बहुत लंबा काल था. ऑटोमन दौर में यह क्षेत्र अलगअलग प्रशासनिक इकाइयों में बंटा रहा. यहां अरब मुसलमान, ईसाई, यहूदी और अन्य समुदाय रहते थे. उन्नीसवीं सदी के अंत में यहां यहूदी आव्रजन बढ़ा. इसी समय आधुनिक जायनिस्ट आंदोलन भी उभरा.
11 अंग्रेजों ने भी किया इस भूमि पर राज
प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑटोमन साम्राज्य हार गया. फिर इस क्षेत्र पर ब्रिटेन का नियंत्रण स्थापित हुआ. इसे ब्रिटिश मैंडेट फॉर पलेस्टाइन कहा गया. यह लीग ऑफ नेशंस की व्यवस्था के तहत था. 1917 की बैलफोर घोषणा में ब्रिटेन ने यहूदी राष्ट्रीय गृह के समर्थन की बात कही. लेकिन यहां पहले से बड़ी अरब आबादी भी रहती थी. यहीं से आधुनिक राजनीतिक टकराव और तेज हुआ. ब्रिटिश शासन 1920 के दशक से 1948 तक चला. इसी दौरान यहूदी और अरब समुदायों के बीच हिंसा, विद्रोह और राजनीतिक संघर्ष बढ़े.
12 1948 में बना इजराइल
साल 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने विभाजन योजना दी. 1948 में एक नए राष्ट्र के रूप में इजराइल राज्य की घोषणा हुई. इसके बाद युद्ध हुआ. इस युद्ध के बाद स्थिति यह बनी कि इजराइल ने बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित किया. वेस्ट बैंक पर जॉर्डन का नियंत्रण रहा. गाजा पर मिस्र का प्रशासन रहा. 1967 के युद्ध में इजराइल ने वेस्ट बैंक, गाजा, पूर्वी यरूशलेम, गोलान और सिनाई पर कब्जा कर लिया. बाद में सिनाई मिस्र को लौटा दिया. आज की बहस मुख्य रूप से इजराइल, वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरूशलेम की राजनीतिक और कानूनी स्थिति पर केंद्रित है.
सरल शब्दों में कहें तो इस भूमि का इतिहास सीधा नहीं है. यह सिर्फ रोमन, ऑटोमन और ब्रिटिश तक सीमित नहीं है. इससे पहले और बाद में भी कई शासक आए. यह क्षेत्र हजारों साल में कई सभ्यताओं, साम्राज्यों और स्थानीय राजसत्ताओं के बीच बदलता रहा. यही वजह है कि आज का विवाद केवल वर्तमान राजनीति का नहीं, बल्कि लंबे इतिहास, धर्म, पहचान, विस्थापन और स्मृति का भी प्रश्न है.
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